INDIAN ART & CULTURE Syllabus(Prelims) :- 1. History of India. (The HPPSC has not separately mentioned about Art & culture in HPAS Prelims' syllabus ) Syllabus(Mains) :- 1. Historical perspective of Indian Cultural heritage : Literature and Art forms from ancient times to 1947 ( Major structural and rock-cut temple architecture, sculptural art and major schools of paintings ). भारतीय सांस्कृतिक विरासत का ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य: प्राचीन काल से 1947 तक साहित्य और कला के रूप (प्रमुख संरचनात्मक और रॉक-कट मंदिर वास्तुकला, मूर्तिकला कला और चित्रकला के प्रमुख स्कूल)। Sources:- 1. For basics, read all chapters of 'An Introduction to Indian Art' Part-1 (भारतीय कला एक परिचय) 11th class NCERT Book.(Chapter 6: Temple Architecture is a must reading) 2. Chapter 1, 2, 6, 7, 14, 15, 17 and 19 of 'Indian Art and Culture' (भारतीय कला एवं संस्कृति) by Nitin Singhaniya or 3. CCRT website for sculptural art and major schools of paintings. Topics:- 1. Cultur...
हाल ही में बरसात के कारण हुई एक बड़ी तबाही ने हिमाचल की जोखिम संवेदनशीलता को चर्चा में ला दिया है। ऐसे में यह सोचना लाजमी है कि कौन-कौन से प्रमुख जोखिम है जो हिमालय की गोद में बसे इस शांत प्रदेश के लिए बड़ी आपदा का रूप ले सकते हैं। लेकिन इससे पहले यह जानना बहुत जरूरी हो जाता है कि जोखिम संवेदनशीलता आखिर है क्या और यह एक बड़ी आपदा में कैसे परिवर्तित हो सकती है? किसी क्षेत्र की जोखिम संवेदनशीलता का अर्थ है उस क्षेत्र का आने वाले संकट के प्रति असुरक्षित होना। हिमाचल में भी ऐसे कई संकट, जैसे, भूस्खलन, बादल फटना, हिमस्खलन, सूखा और बाढ़ आदि आने की संभावनाएं हमेशा बनी रहती है और हिमाचल भूकंप जोन 4 और 5 में स्थित है। ऐसे में यदि इनसे बचने के लिए समय रहते सार्थक प्रयास नहीं किए जाते हैं तो ये एक बड़ी आपदा में बदल सकते हैं। एक तरफ जहां कांगड़ा में भूकंप आने की अधिक संभावना रहती है, वहीं ऊना हर वर्ष बाढ़ और सुखे का शिकार होता है। किन्नौर में हर वर्ष भूस्खलन की घटनाएं होती है, पांगी और लाहौल-स्पीति के ऊपरी क्षेत्रों में हिमस्खलन की घटनाएँ होती रह्ती है, वहीं दूसरी तरफ हिमाचल के अलग-अलग हिस्सों...